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चित्रकूट में बाढ़ की तबाही का सीएम ने लिया जायजा, बोले- नदी को उसके स्वाभाविक प्रवाह का रास्ता देना होगा

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हवाई सर्वेक्षण के बाद रामघाट पहुंचे मुख्यमंत्री, NDRF-SDRF और PAC फ्लड की आठ टीमें भेजने की दी जानकारी

बाढ़ पीड़ितों को पीएम-सीएम आवास और नुकसान का मुआवजा देने का भरोसा, नदी किनारे अतिक्रमण हटाने की बात

रमेश द्विवेदी

चित्रकूट। जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद मुख्यमंत्री ने हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद वह रामघाट पहुंचे और बाढ़ से हुई तबाही को मौके पर देखा। इस दौरान उन्होंने बाढ़ प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस दिन बाढ़ आई, उस समय वह बस्ती में थे। वहीं से उन्होंने डीजी पीएसी को निर्देश देकर राहत और बचाव के लिए टीमें भेजने को कहा था। उन्होंने बताया कि शुरुआत में चित्रकूट में एसडीआरएफ की केवल एक टीम उपलब्ध थी, लेकिन स्थिति को देखते हुए तत्काल एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पीएसी फ्लड की आठ टीमों को मौके पर भेजा गया। पूरे हालात की लगातार समीक्षा करते हुए लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट में इस तरह की बाढ़ पहली बार देखने को मिली है। उन्होंने बाढ़ की भयावहता का जिक्र करते हुए कहा कि भीषण बाढ़ में मध्य प्रदेश का पक्का पुल तक बह गया। इससे आपदा की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में लगातार निर्माण होने और जल निकासी के रास्ते कम होने से ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है। नदी का स्वरूप हमेशा एक जैसा नहीं रहता और पानी के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा आने पर उसका फैलाव बढ़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के बावजूद सभी लोगों के सुरक्षित रहने को उन्होंने भगवान कामदगिरि, हनुमान जी और ऋषि-मुनियों की कृपा बताया।

बाढ़ पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी प्रभावित व्यक्ति खुद को अकेला न समझे। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चित्रकूट इससे पहले भी बाढ़ की त्रासदी झेल चुका है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि 2017 से पहले बाढ़ के दौरान राहत कार्यों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता था और राहत सामग्री को लेकर भी अनियमितताएं होती थीं। उन्होंने कहा कि सरकार बनने के बाद उन्होंने स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और उसके बाद राहत किट तैयार कराई गई।

मुख्यमंत्री ने नदी किनारे अतिक्रमण के मुद्दे पर भी सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नदी के किनारे किए गए अतिक्रमण को हटाया जाएगा और भविष्य में इसे रोकना होगा। नदी को उसके स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त रास्ता देना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अधिकारियों के साथ बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की समीक्षा भी करेंगे। उन्होंने व्यापारियों, किसानों और बाढ़ प्रभावित परिवारों को नुकसान का मुआवजा देने का भरोसा दिलाया। उन्होंने बताया कि नुकसान का सर्वे कराया जा रहा है और सरकार की ओर से बजट की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

अंत में मुख्यमंत्री ने चित्रकूट से अपने भावनात्मक जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि जब प्रभु राम संकट में थे, तब चित्रकूट ने उनका साथ दिया था। आज चित्रकूट संकट में है, इसलिए वह राम भक्त बनकर यहां आए हैं।

 

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